इंतज़ार

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प्रसंग: इन पंक्तियों के माध्यम से मै अपने प्रेमी को याद करता हूँ जो इस समय मुझ से बहुत दूर है.
दूरियों के ख़त्म होने और उसे पुनः छू पाने का इंतज़ार कायम है
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हम तुम फिर साथ होंगे, फासले भी खत्म होंगे
मै इंतज़ार करता हूँ।

तुम्हे पुकार कर तुम्हारी आवाज़ का
मै इंतज़ार करता हूँ।

बहुत बैचैनी से तुम्हारे प्यार भरी इशारे का
मै इंतज़ार करता हूँ।

तुम्हारे इस कठिन समय का मेरी बाहों की ठंडक में बीत जाने का
मै इंतज़ार करता हूँ।

समाज ने तो बनाई ही हैं, हमारी ज़िन्दगी के इस पड़ाव से बनी दूरियां भी कम होंगी
मै इंतज़ार करता हूँ।

तुम भी कभी मुझे सागर भर प्रेम करोगे
मै इंतज़ार करता हूँ।

जिस सुबह का आरम्भ तुम्हारे आगोश में हो उसका
मै इंतज़ार करता हूँ।

ज़िन्दगी छोटी है, जवानी भी क्षणिक
लेकिन इस जीवन को तुम्हारे साथ बिताने का मै इंतज़ार करता हूँ।

इन्द्रशानुष के रंगो से खुशनुमे हमारे इस साथ का, मेरे इस देश में भी सम्मान होगा
मै इंतज़ार करता हूँ।


अनुपम श्रीवास्तव (इंदौर)

मेरा नाम अनुपम है और मैं इंदौर में निवास करता हूँ। यहीं पर एक कम्पनी में प्रबंधक की भूमिका में कार्यरत हूँ। हिंदी से मेरा नाता सिर्फ स्कूली भाषा के रूप में ही सीमित नहीं है। मेरी माँ हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विदुषी हैं और उनका मेरे जीवन के हर क्षेत्र में उनका बहुत प्रभाव है।