अँधा

प्यार अँधा होता है,
है ना?

प्यार जाति नही देखता,
प्यार मज़हब नही देखता,
रंगों की होली में अँधा,
प्यार घुल-मिल जाता है.

प्यार उम्र नही देखता,
प्यार पहचान नही देखता,

प्यार अंत नही मानता,
प्यार विश्वात्मक होता है.

तो प्यार ka सिर्फ लिंग क्यों परखना?

वैसे देखे तो-
सिर्फ प्यार ने लिंग क्यों देखना?

दोस्ती लिंग नही देखती,
आदर लिंग नही देखता
भक्ति तो अलैंगी ही.

स्वाभिमान लिंग नही परखता.

उदारता, दयाभाव
सत्य.

सब प्यार के रूप नही क्या?
तो सिर्फ प्यार ने लिंग क्यों देखना?

प्यार को अँधा रहने दो.
सत्य को, न्याय को अँधा रहने दो.
पर आप आँखे खोलो.

नफ़रत के कोहरे को,
अज्ञान के अंधकार को,
आप को अँधा करने मत दो.

प्यार को आज़ादी दो.
नफ़रत से आज़ाद हो जाओ.

377 निकाल दो.

मिहीर भोसले

मिहीर भोसले यह खुद को 'बहुस्वरूपी निराला इनसान' मानता है. वह भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान, मुंबई में सिविल अभियांत्रिकी पढ़ता है. वह पेशेवर कवि, लेखक वा कलाकार नहीं है, पर उसको बीच-बीच में रचनात्मकता के बेतरतीब झटकें लगते हैं, जिन से, उस के हिसाब से सुंदर लगने वाली चीज़ें बनती है/