माँ की चिट्ठी




मेरे प्यारे बेटे,
ढ़ेर सारा प्यार और स्नेहाषीश के साथ लिख रही हूँ कि तुम्हें हमारे आँचल में ईश्वर ने काफी मन्नत के बाद दिया है और जैसे भी दिया है मैं काफी खुश तथा संतुष्ट हूँ। तुम्हारे अन्दर की घुटन महसुस कर बहुत दर्द हो रहा है। तुम्हें बहुत पहले ही माँ से अपनी सारी बातें शेयर करनी चाहिए थी। तुम प्रभावशाली व्यक्तित्व के एक अच्छा इन्सान बनो इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए। माँ अपने बच्चे को समग्रता एवं गुणात्मक विकास से परिपूर्ण करना चाहती है। इसलिए तुम अपने मन के अन्दर बैठे हुए संकोच, भय तथा द्वन्द से अपने को मुक्त कर आगे की जिन्दगी को आनन्द तथा उल्लास के साथ जीयो।

मुझे अपनी परवरिश पर काफी गर्व है कि तुम एक अच्छे इन्सान के रूप में उभर कर आये हो। तुम अपने आप को सशक्त कर अपने अन्दर की शक्ति को अपनी दृढ़ इच्छा के द्वारा पूर्णता की ओर अग्रसर करो। समाज के समक्ष अपनी संपूर्णता के साथ आओगे तो कुछ कमियाँ अपने आप गुम हो जाती है। इसलिए मेरे बेटे! तुम अपने अन्दर कोई कमी महसूस नहीं करो। तुम्हारे लैंगिकता के प्रश्न को लेकर मुझे और तेरे बाबा को कोई शिकवा नहीं है। प्रकृति ने मनुश्य को जैसा स्वरूप दिया है उसे सबों को सहर्श स्वीकार करना चाहिए। अपने वश में जो न हो उसकी चिन्ता या दुःख करने की जरूरत नहीं।

मेरे प्यारे बेटे! मेरा प्यार और विश्वास सदा ही तुम्हारे साथ था और रहेगा। तुम जैसे भी हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता बस तुम अपने कर्त्तव्य एवं जिम्मेवारियों के साथ सदा खुश रहो, उन्नति करो। सहिश्णुता के साथ अपने काम में मन लगा एक अच्छे व्यक्तित्व वाला इन्सान बनो।
और हाँ! तुम्हारे घर आने का इंतज़ार रहेगा और बातें करेंगे|

ढेर सारा प्यार
तुम्हारी प्यारी माँ।

पुष्पा प्रसाद

‘प्यारी माँ’ पुष्पा प्रसाद हमारे ही संकलन में मौजूद लेखक आदित्य शंकर उर्फ़ ‘बिहारी बाबु’ की माँ हैं | १९७० के दशक में इन्होंने अपने बैच-मेट के साथ, समाज के सामने अंतरजातीय लव मैरेज किया था| बिहारी बाबु इनकी चौथी संतान हैं | इन्हें बच्चों की चिंता से फुर्सत मिलने के बाद गाने का और पूजा-पाठ करने का शौक़ है|