जन्मदिन

शरद की बहार थी
सूरज अभी भी आसमान की गोद में लपेटा पड़ा था
रास्ता कच्चा था
पर मंज़िल तक भी पहुचना था

पलके पूरी तरह खुली नहीं थी
और देर होने का भी डर था
कैसे तो अद-जगी हालत में
ऊबड़-खबड रास्तो को मात दे
मंज़िल तक पहुंच गया

वो कही न था
लगा की वह चला गया
पर थोड़ा आगे बड़ कर देखा
तो दबे पाओ की आवाज़ आई
गहरी सास ले मैं आगे बड़ा
देख मुझे वो चौक गया
और कह बैठा, "पागल है क्या"

ज़वाब में 'हां' कहकर
मेने उसका हाथ थामा
जन्मदिन की शुभकामनाए कर
उसे उसका तोफा दिया
तोफा... एक ख़ास दिन का
तोफा... उसका मेरे साथ होने का
तोफा... प्यार के प्रतिक का

वो बहुत खुश था
मुझसे हाथ मिलाकर पूछा
"रिटर्न गिफ्ट में क्या चाहिए?"
मेरा जव्वाब यही था
"आखरी साँस तक तेरा साथ चाहिए"
"बस इतना ही?" कहकर
मेरे वचन पूर्ति की उसने कसम ली

लगा था की
ऐसी और सुबह आएगी
जहाँ उसे मैं खुश कर सकु,
मेरा प्यार दे सकु,
उसे अपना बना सकु.…

पर ना ऐसी कोई सुबह आई
ना उसे साथ निभाने की कसम याद आई

फिर वो भोर आती है
फिर वो कोशिश याद आती है
फिर उसका जन्मदिन आता है
फिर उसकी याद आती है
पर हारा दिल कुछ न कर सका
और कठोर दिल इस मन को पड़ न सका.…

जे. एस. शैलेश

नमस्ते। मैं जे. एस. शैलेश हूँ। मैं २१ वर्षीया समलैंगिक हूँ। कहा रहता हूँ वह नहीं बताऊंगा पर अपने व्यवहार से लोगो के दिलो में रहना पसंद करूँगा। पसंद की कहे तो मुझे नयी चीज़े सीखना बोहत पसंद हैं.. कुछ भी नया करना पसंद हैं (चाहे वो कुछ भी हो :P) मैं अपने परिवार के साथ जैसा हूँ अपनी असलियत के साथ रहता हूँ। मैंने किसी को अँधेरे में नहीं रखा। हमेशा कोशिश की कि जो हूँ, जैसा हूँ, वैसा ही रहूँ। मुझे सोसाइटी की कही-सुनी बातों से फर्क नहीं पड़ता, जो मुझे सही लगा और जो सही में सही हैं, वही किया और आगे भी करने की हिम्मत रखूँगा। मैंने अपने प्यार के बिछड़ने के याद में कुछ शब्दों को जोड़कर स्याही की मदत से पन्नो पे सजाया हैं।हलाकि ये मेरी पहली कोशिश हैं। आशा हैं की सभी को पसंद आये और मुझे और लिखने का मौका मिले। धन्यवाद!